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delhi, India
I m a prsn who is positive abt evry aspect of life. There are many thngs I like 2 do, 2 see N 2 experience. I like 2 read,2 write;2 think,2 dream;2 talk, 2 listen. I like to see d sunrise in the mrng, I like 2 see d moonlight at ngt; I like 2 feel the music flowing on my face. I like 2 look at d clouds in the sky with a blank mind, I like 2 do thought exprimnt when I cannot sleep in the middle of the ngt. I like flowers in spring, rain in summer, leaves in autumn, freezy breez in winter. I like 2 be alone. that’s me

Sunday, August 18, 2013

नीली खामोशियां...

Jodhpur Palace
वक्‍़त ग़ुज़र रहा है. आज भी हर दिन मन उतना ही बेताब होता है तुमसे एक बार बात करने के लिए...आठ महीने गु़ज़र गए. लेकिन मै भी सिर्फ दिल की सुनती हूं, जब दिल को तुम्‍हारी आवाज सुनने का मन करता है तो झट से ऑफिस का नंबर घुमा देती हूं. जानती हूं कि तुम्‍हारे ऑफिस के फोन में कॉलर आईडी नहीं है और ये भी जानती हूं कि मेरे फोन को मेरे बिना बात करने पर भी तुम समझ जाते हो. 
बहुत याद आए उस दिन तुम... शाम को सब चांद का इंतजार कर रहे थे, चांद आया भी, लेकिन पहली बार ये चांद मेरे लिए नहीं था. चांद अजनबी मालूम पड़ रहा था, दो-तीन बार मोबाइल उठाकर देखा, तुम्‍हारे सबसे पहले 'चांद मुबारक' का मैसेज का इंतजार था. 
इस बार भी ईद की शॉपिंग की फर्क सिर्फ इतना रहा कि सब अकेले खरीदा और तुम्‍हारे लिए खरीदा. सब कुछ भेजा तुम्‍हारे ऑफिस के पते पर, लेकिन नाम नहीं छोडा़. जिंदगी में कुछ रिश्‍ते शायद खामोशी से ही साथ चलते हैं. 
खैर, वक्‍त बदलता है और शायद वक्‍त के साथ लोग भी... मेरे लिए तुम्‍हारा साथ रहना जरूरी नहीं है, बल्कि तुम्‍हारा साथ होना जरूरी है. शायद इसलिए इस ईद तुम्‍हारी आवाज सुने बिना ही गुजरी. लेकिन तुम्‍हे बिना देखे कैसे गुजरती भला. 
ये ईद मीठी सेवइयों के साथ नहीं मनाई मैने, बल्कि पुरानी तस्‍वीरों को बाहर निकाला, हर उस वक्‍त को एक बार फिर से जीया, तुम्‍हारी मौजूदगी को महसूस किया, तुम्‍हारे साथ बिताए लम्‍हों को याद किया. जयपुर की रातें, दिल्‍ली की बातें, देर रात तक बातें करना, ईद की शॉपिंग, हर रंग की चमक का आंखों में दिखना. सब याद आया.
इन्‍हीं यादों के साथ चांद देर रात तक मेरे सिरहाने बैठा रहा, तड़के चांद मुझे मेरी यादों साथ छोड़कर चला गया. इस तरह नीली खामोशियों के आगोश में गुजरी रात, तुम्‍हारे साथ, तुम्‍हारी यादों के साथ...

5 comments:

  1. तू इतनी निर्मम क्यूँ है ज़िन्दगी?
    नीली खामोशियों का विस्तार यहाँ नील गगन पर भी पसरा देख रहे हैं, बादल दुआ भेज रहे हैं यहाँ से कि जो साथ रहना न हुआ मुमकिन मगर ये साथ होना कभी न बीते कल की बात बनें! ये साथ होना जीवन के भी साथ होना हो...
    जब जीवन रुखाई से पेश आये तो हमें ही कुछ नरमी के साथ उसके साथ होने का प्रयास करना होता है न...
    ऐसे ही तो जीते हैं हम, प्यार करते हैं हम तमाम विरोधाभासों के बावजूद जीवन को...!

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  2. आपकी इस प्रस्तुति की चर्चा कल सोमवार [19.08.2013]
    चर्चामंच 1342 पर
    कृपया पधार कर अनुग्रहित करें
    सादर
    सरिता भाटिया

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  3. यादें हों तो उनका न होना भी चलता है ...
    पर ऐसे में दिल अक्सर रोता है ... गहरा एहसास समेटे ...

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