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| clicked by Mahi S, Jaipur flat |
बुरा गुज़रा दिन....अब तक का सबसे बुरा शायद...कुछ यही सोचकर दिन गुज़र गया था....मै माफ़ी मांगने के लिए जैसे ही कमरे में गयी देखा तुम्हे सुकून से सोते हुए...कमरे में अँधेरा था...मैंने बालकोनी का दरवाज़ा खोला, आसमान बादलों से घिर आया था...बारिश मानो बादलों के कैद से छूटकर बेपरवाह होकर बरसने को बेताब थी ...बहुत खूबसूरत दिख रहा था आसमान आज...मेरा था वो...मेरा आसमान...मैंने फिर कमरे में देखा, तुमने करवट ली...बहुत आराम से...शायद यही एहसास जिसे मै जी रही थी उसे सुकून कहते हैं...तमाम मुश्किलों के बाद भी मैंने जीया उस सुकून को...तुम्हे देखेने का सुकून, तुम्हारे पास होने का सुकून!!!

